श्री. रावसाहेब वामनराव वाडेगांवकर

TBRAN Hindi    20-Jun-2019
संस्थापक – एक अनुकरणीय जीवनी
द ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन नागपुर (T.B.R.A.N.) के संस्थापक श्री रावसाहेब वामनराव वाडेगांवकर दृष्टिहीन विद्यार्थियों के जीवन में आशा की किरण साबित हुए। स्वयं दृष्टिहीन होने के बावजूद उनके पास निस्वार्थ एवं निर्धारित रूप से काम करने की दृष्टि थी | अपने सपनों को पूरा करने और सफलता का साक्षी होने में एक दृष्टिहीन व्यक्ति जिन कठिनाईयों एवं क्लेशों का सामना करता है उससे वे स्वयं भली-भांति परिचित थे ।

 
 
“असंभव – कुछ भी नहीं” इस उक्ति में डॉ.वाडेगांवकर दृढ़ विश्वास रखते थे और इसी सूत्र पर चलते हुए उन्होंने दृष्टिबाधितों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का काम निष्ठापूर्वक किया। उन्होंने दृष्टिहीनों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए एवं उन्हें पूरी गरिमा के साथ अपना जीवन-यापन करने योग्य बनाने के लिए वामनराव ने उन्हें अच्छी तरह शिक्षित करने का ईमानदारी से प्रयास किया | इन लोगों के जीवन में वह किसी देव-दूत से कम नहीं |
 
डॉ. वामनराव वाडेगांवकर ने हमेशा ही दृष्टिहीनों की सेवा का कार्य पूरी लगन से किया और उनकी इसी सेवा के लिए लंदन के किंग जॉर्ज पंचम ने १२ मई १९३७ उन्हें 'राव साहेब' की उपाधि से गौरवान्वित किया | धरातल पर अपना कार्य पूरा करके १९६६ में वह स्वर्गवासी हुए | अपने सदय स्वभाव, नेक काम, सादगी और निस्वार्थ सेवा के लिए डॉ. वामनराव वाडेगांवकर सदा अमर रहेंगे। यह डॉ. वाडेगांवकर और उनके परिवार का समर्पण और प्रतिबद्धता ही थी, जिसके चलते यह अंध विद्यालय इतना समृद्ध हुआ। डॉ.वाडेगांवकर की असाधारण कार्य क्षमता और संचार कौशल ने इस अंध विद्यालय को फलने-फूलने में मदद की और विकास के इस स्तर पर पहुँचाया है |